साल 2026 की शुरुआत के साथ ही भारतीय राजनीति में नए समीकरण बनते और बिगड़ते दिख रहे हैं। दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों में झटके खाने के बाद, विपक्षी गठबंधन 'INDIA' (इंडिया ब्लॉक) के अस्तित्व पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन के कई प्रमुख दल अब "एकला चलो" की राह पर विचार कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में मतभेद सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल से आ रही है, जहाँ 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। रिपोर्ट्स हैं कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं, जिससे कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग की उम्मीदें धूमिल हो रही हैं। उधर, महाराष्ट्र में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में महा विकास अघाड़ी (MVA) के घटक दलों के बीच तालमेल की कमी साफ देखी गई, जिसका सीधा फायदा सत्ताधारी पक्ष को मिला।
कांग्रेस के सामने अस्तित्व की लड़ाई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 कांग्रेस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहाँ पार्टी मजबूत स्थिति में थी, अब उसे अपनी ही सहयोगी पार्टियों से कड़ी शर्तों का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी कुनबे को एकजुट रखने की होगी, क्योंकि कई क्षेत्रीय क्षत्रप अब कांग्रेस के नेतृत्व को स्वीकार करने में हिचकिचा रहे हैं।