नए साल की शुरुआत के साथ ही देश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि केंद्र सरकार आगामी बजट सत्र (फरवरी 2026) में 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - UCC) बिल को संसद में पेश करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कानून मंत्रालय ने इस विधेयक के अंतिम मसौदे को मंजूरी दे दी है और अब इसे कैबिनेट की मुहर का इंतज़ार है।
क्या बदलेगा UCC आने से? अगर यह कानून लागू होता है, तो देश में सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में एक ही कानून लागू होगा। अभी हर धर्म के अपने अलग 'पर्सनल लॉ' हैं। सरकार का तर्क है कि यह महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के लिए जरूरी कदम है। उत्तराखंड में इसे पहले ही लागू किया जा चुका है और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लाने की योजना है।
विपक्ष ने बताया 'ध्रुवीकरण' की कोशिश इस खबर के बाहर आते ही विपक्षी खेमे में हड़कंप मच गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कल 'INDIA' गठबंधन के नेताओं की एक आपात बैठक बुलाई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महंगाई और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जबरन इसे थोपने की कोशिश की, तो देश भर में शाहीन बाग जैसे आंदोलन होंगे।
संसद में होगा भारी हंगामा राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बजट सत्र बेहद हंगामेदार होने वाला है। राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत का गणित थोड़ा पेचीदा है, इसलिए इस बिल को पास कराना एनडीए (NDA) के लिए आसान नहीं होगा।