नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के कारण चार साल की देरी के बाद, भारत की दशकीय जनगणना (Census 2025) की प्रक्रिया आज (1 अप्रैल 2025) से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। यह देश की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना है। इस बार की सबसे खास बात यह है कि यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना (Digital Census) है। अब कागज-कलम की जगह प्रगणक (Enumerators) टैबलेट और मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करेंगे।
गृह मंत्रालय ने नागरिकों को 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (Self-Enumeration) की सुविधा भी दी है, यानी आप सरकारी पोर्टल पर जाकर अपने परिवार का डेटा खुद भी भर सकते हैं। इस जनगणना में जातिगत आंकड़ों को लेकर भी चर्चा तेज है, हालांकि सरकार ने अभी तक केवल एससी/एसटी की गिनती की पुष्टि की है। जनगणना दो चरणों में होगी: पहले चरण में मकानों की सूचीकरण (House Listing) और दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "यह जनगणना भविष्य की योजनाओं का आधार बनेगी। डिजिटल होने के कारण डेटा का विश्लेषण बहुत तेजी से और सटीक होगा।" इस विशालकाय कार्य में करीब 30 लाख सरकारी कर्मचारी और शिक्षक लगाए गए हैं। जनगणना 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद लोकसभा सीटों का परिसीमन (Delimitation) किया जाएगा।
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विपक्षी दलों ने मांग की है कि इसमें ओबीसी का डेटा भी अलग से इकट्ठा किया जाए ताकि आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का सही लाभ मिल सके। यह डेटा भारत की बदलती जनसांख्यिकी की असली तस्वीर पेश करेगा।