नई दिल्ली: 5G की सफलता के बाद भारत ने अब 6G तकनीक में वैश्विक नेतृत्व करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में 'भारत 6G मिशन' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य 2030 तक भारत में 6G सेवाओं को रोलआउट करना है।
सरकार ने 6G रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष की घोषणा की है। आईआईटी मद्रास और आईआईटी दिल्ली में 6G टेस्ट बेड स्थापित किए जाएंगे। 6G तकनीक 5G से 100 गुना तेज होगी और यह होलोग्राफिक संचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को नए स्तर पर ले जाएगी।
टेलीकॉम मंत्री ने कहा कि भारत अब टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनेगा। नोकिया और एरिक्सन जैसी कंपनियों ने भी भारत में अपने 6G रिसर्च सेंटर खोलने की घोषणा की है।