मुंबई: भारत के सबसे सम्मानित उद्योगपति और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा (Ratan Tata) का बुधवार रात (9 अक्टूबर) मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से पूरा देश शोक में डूब गया है। एक ऐसा शख्स जिसने नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक और नैनो से लेकर जगुआर तक भारत का नाम रोशन किया, आज अनंत यात्रा पर चला गया।
सादगी और दानवीरता की मिसाल
रतन टाटा अपनी सादगी और परोपकार के लिए जाने जाते थे। अपनी कमाई का 60% से ज्यादा हिस्सा वे चैरिटी में दान कर देते थे। 26/11 मुंबई हमले के दौरान ताज होटल के कर्मचारियों की मदद हो या कोरोना काल में 1500 करोड़ का दान, वे हमेशा देश के लिए खड़े रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "वे एक विजनरी बिजनेस लीडर और असाधारण इंसान थे।"
भारत रत्न की मांग
महाराष्ट्र सरकार ने उनके सम्मान में एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सोशल मीडिया पर उन्हें 'भारत रत्न' देने की मांग तेज हो गई है। उनके जाने से भारतीय उद्योग जगत में जो शून्य आया है, उसे भरना असंभव है।