वायनाड (केरल): जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत में केरल के वायनाड जिले में भारी बारिश के बाद आए विनाशकारी भूस्खलन (Landslides) ने तबाही की दास्तां लिख दी है। मुंडक्कई और चूरलमाला गांवों में रात के अंधेरे में पहाड़ दरक गया, जिससे 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। यह केरल के इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक है।
भारतीय सेना, एनडीआरएफ और वायुसेना ने एक विशाल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। सेना ने केवल 31 घंटों में 'बेली ब्रिज' (Bailey Bridge) बनाकर संपर्क टूटे इलाकों तक मशीनरी पहुंचाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अगस्त को वायनाड का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत शिविरों में पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने इसे 'राष्ट्रीय त्रासदी' जैसा बताया।
वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी घाट (Western Ghats) के संवेदनशील इलाकों में अनियंत्रित निर्माण का परिणाम बताया है। कई परिवार पूरी तरह खत्म हो गए हैं। पूरा देश केरल की मदद के लिए आगे आया है।