नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स (Electoral Bonds) का डेटा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को सौंप दिया, जिसे आयोग ने 14 मार्च को अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया। इस डेटा ने भारतीय राजनीति और कॉर्पोरेट जगत के बीच के रिश्तों की एक झलक पेश की है।
डेटा के मुताबिक, 'फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज' (लॉटरी कंपनी) ने सबसे ज्यादा 1,368 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे। इसके बाद मेघा इंजीनियरिंग (966 करोड़) का नंबर है। कई बड़ी कंपनियों जैसे भारती एयरटेल, वेदांता और डीएलएफ का नाम भी डोनर्स की लिस्ट में शामिल है। भाजपा, कांग्रेस, टीएमसी और बीआरएस जैसी पार्टियों ने करोड़ों रुपये के बॉन्ड भुनाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को 'असंवैधानिक' करार दिया था। यह डेटा सार्वजनिक होने से विपक्ष और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जनता के लिए यह जानना महत्वपूर्ण था कि राजनीतिक दलों को कौन फंडिंग कर रहा है।