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Silkyara Tunnel Rescue: 17 दिन, 41 जान और 'रैट माइनर्स' का कमाल; उत्तरकाशी टनल से सुरक्षित बाहर आए सभी मजदूर, देश ने ली राहत की सांस

Silkyara Tunnel Rescue Operation
Image Source: Wikimedia Commons (Representative)

उत्तरकाशी (उत्तराखंड): "हिम्मत, दुआ और तकनीक की जीत!" उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा टनल (Silkyara Tunnel) में पिछले 17 दिनों से फंसे 41 मजदूरों को आज (28 नवंबर) सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दिवाली के दिन (12 नवंबर) हुए भूस्खलन के बाद ये मजदूर सुरंग के अंदर कैद हो गए थे। जब अमेरिका की आधुनिक ऑगर मशीनें भी जवाब दे गईं, तब भारतीय जुगाड़ और 'रैट माइनर्स' (Rat-Hole Miners) के हाथों ने वो कर दिखाया जिसे दुनिया चमत्कार कह रही है।

हाथों से खोदा पहाड़, जीती जिंदगी

रेस्क्यू ऑपरेशन के आखिरी चरण में ऑगर मशीन का ब्लेड टूट गया था। इसके बाद दिल्ली और झांसी से बुलाए गए रैट माइनर्स ने हाथों से मलबा खोदकर पाइप डालने का रास्ता बनाया। शाम करीब 7:30 बजे पहला मजदूर बाहर निकला। सीएम पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने खुद टनल के मुहाने पर खड़े होकर मजदूरों का स्वागत किया और उन्हें गले लगाया। सभी मजदूरों को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, हालांकि सभी स्वस्थ बताए जा रहे हैं।

मजदूरों ने कहा- हमें उम्मीद थी

बाहर आए मजदूरों ने बताया कि उन्हें पाइप के जरिए खाना, पानी और ऑक्सीजन मिल रहा था, जिससे उनकी हिम्मत बनी रही। उन्होंने अंदर लूडो खेलकर और योग करके समय बिताया। पीएम मोदी ने फोन पर मजदूरों से बात की और उनके धैर्य की सराहना की। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और बीआरओ समेत कई एजेंसियों ने दिन-रात एक कर दिया था। यह दुनिया के सबसे सफल रेस्क्यू ऑपरेशन्स में से एक माना जा रहा है।

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