नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: भारतीय शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत में 24 जनवरी को भूचाल आ गया। अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने अडाणी समूह (Adani Group) के खिलाफ एक सनसनीखेज रिपोर्ट जारी की, जिसमें समूह पर 'दशकों से स्टॉक हेरफेर और अकाउंटिंग धोखाधड़ी' करने का गंभीर आरोप लगाया गया। रिपोर्ट का शीर्षक था- "दुनिया का तीसरा सबसे अमीर आदमी कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा धोखा कैसे कर रहा है।"
इस रिपोर्ट के आते ही अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और अडानी ग्रीन एनर्जी समेत सभी कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए। गौतम अडानी की नेटवर्थ (Net Worth) को एक ही दिन में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और वे दुनिया के शीर्ष अमीरों की सूची में नीचे खिसक गए। यह रिपोर्ट अडानी एंटरप्राइजेज के 20,000 करोड़ रुपये के एफपीओ (FPO) के खुलने से ठीक पहले आई।
अडाणी समूह ने इन आरोपों को "बकवास और आधारहीन" बताते हुए इसे भारत की विकास गाथा पर हमला करार दिया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। हिंडनबर्ग ने चुनौती स्वीकारते हुए कहा कि वे अपनी रिपोर्ट पर कायम हैं। इस विवाद ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर और एलआईसी के निवेश को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।