मैनपुरी/लखनऊ: समाजवादी पार्टी के संस्थापक और 'धरतीपुत्र' मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई उनकी पारंपरिक मैनपुरी लोकसभा सीट (Mainpuri Lok Sabha Seat) पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज घोषित कर दिए गए हैं। सपा प्रत्याशी और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव (Dimple Yadav) ने न सिर्फ यह सीट बचाई है, बल्कि एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया है जिसने उनके ससुर 'नेताजी' की जीत के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है।
नेताजी को सच्ची श्रद्धांजलि: 2.88 लाख वोटों का अंतर
डिंपल यादव ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य को 2,88,136 वोटों के भारी अंतर से हराया है। यह मैनपुरी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीत है। याद रहे कि 2019 में मुलायम सिंह यादव यहां से करीब 94,000 वोटों से जीते थे। डिंपल यादव ने इस जीत को 'नेताजी' (मुलायम सिंह) को समर्पित करते हुए कहा, "यह मेरी जीत नहीं, यह नेताजी के आशीर्वाद और मैनपुरी की जनता के प्यार की जीत है। मैं उनकी विरासत को पूरी जिम्मेदारी से संभालूंगी।"
सैफई परिवार हुआ एक: चाचा शिवपाल का विलय
इस चुनाव का सबसे बड़ा सियासी हासिल यादव परिवार का पुनर्मिलन रहा। चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव और उनके नाराज चाचा शिवपाल यादव एक साथ मंच पर दिखे थे। जीत के तुरंत बाद शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी 'प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया)' का आधिकारिक रूप से समाजवादी पार्टी (SP) में विलय कर दिया। सैफई में अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उन्हें सपा का झंडा सौंपा। शिवपाल ने कहा, "अब हम एक हैं और 2024 में भाजपा को उखाड़ फेंकेंगे।"
रामपुर और खतौली में क्या हुआ?
जहां मैनपुरी में सपा जीती, वहीं आजम खान का अभेद्य किला माने जाने वाले रामपुर (Rampur) में भाजपा ने सेंध लगा दी है। भाजपा के आकाश सक्सेना ने सपा के आसिम राजा को हराकर इतिहास रच दिया। यह पहली बार है जब रामपुर सदर सीट पर कमल खिला है। वहीं, खतौली विधानसभा उपचुनाव में सपा-रालोद गठबंधन के मदन भैया ने भाजपा की राजकुमारी सैनी को हराकर जीत दर्ज की।