बेंगलुरु: भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) में एक नया इतिहास लिखा गया है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की टीम ने बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में दिग्गज टीम मुंबई को 6 विकेट से हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत लिया है। मुंबई, जो इस टूर्नामेंट की 41 बार की विजेता है, को हराकर एमपी ने साबित कर दिया कि क्रिकेट अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है。
इस जीत के पीछे सबसे बड़ा हाथ कोच चंद्रकांत पंडित (Chandrakant Pandit) का रहा। दिलचस्प बात यह है कि 1999 में जब एमपी फाइनल में हारी थी, तब पंडित टीम के कप्तान थे, और आज कोच बनकर उन्होंने वह सपना पूरा किया। फाइनल में यश दुबे, शुभम शर्मा और रजत पाटीदार ने शानदार शतक जमाए। कुमार कार्तिकेय की गेंदबाजी ने भी अहम भूमिका निभाई।
सरफराज खान (मुंबई) ने शानदार बल्लेबाजी की, लेकिन एमपी का टीम वर्क भारी पड़ा। जीत के बाद खिलाड़ियों की आंखों में खुशी के आंसू थे। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने टीम का भव्य स्वागत करने की घोषणा की। यह जीत छोटे शहरों के क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।