नई दिल्ली: कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने स्कूली शिक्षा को कितना नुकसान पहुंचाया है, इसकी एक डरावनी तस्वीर ASER (Annual Status of Education Report) 2021 में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के दौरान सरकारी स्कूलों में नामांकन तो बढ़ा है, लेकिन बच्चों के सीखने की क्षमता (Learning Outcome) में भारी गिरावट आई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ग्रामीण भारत में ट्यूशन लेने वाले छात्रों की संख्या में 40% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो यह दर्शाता है कि स्कूल बंद होने से माता-पिता को निजी ट्यूशन का सहारा लेना पड़ा।
रिपोर्ट बताती है कि स्मार्टफोन की उपलब्धता तो बढ़ी है (67.6%), लेकिन केवल 27% बच्चे ही इसका इस्तेमाल पढ़ाई के लिए कर पा रहे हैं। कई बच्चे बुनियादी पाठ पढ़ने में भी असमर्थ हो गए हैं। डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) ने अमीर और गरीब बच्चों के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। यह सर्वे 25 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों के दोबारा खुलने के बाद शिक्षकों के सामने एक बड़ी चुनौती होगी कि वे इस 'लर्निंग गैप' को कैसे भरें। सरकार को अब उपचारात्मक कक्षाओं (Remedial Classes) पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि महामारी के कारण पीछे छूट गए बच्चों को मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।