उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चिंता बढ़ा दी है। कोरोना संकट के बीच आए इन नतीजों में समाजवादी पार्टी (SP) ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि भाजपा को अपने ही मजबूत गढ़ों में हार का सामना करना पड़ा है।
सबसे बड़ा झटका भाजपा को अयोध्या (Ayodhya) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) में लगा है। राम मंदिर निर्माण के केंद्र अयोध्या में जिला पंचायत की 40 सीटों में से भाजपा दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकी, जबकि सपा ने यहां बड़ी बढ़त बनाई है। वाराणसी में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन नतीजों को 'जनता का जनादेश' बताते हुए कहा है कि यह भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों और कोरोना कुप्रबंधन का जवाब है। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन का असर साफ दिखा, जहां रालोद (RLD) और सपा गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया।
वहीं, बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने भी सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया है। हालांकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि पंचायत चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं और इसका असर विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) की शुरुआत मान रहे हैं।