उत्तर प्रदेश की राजनीति में इसे 'सत्ता का जादू' कहें या 'मैनेजमेंट का कमाल', लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में ऐतिहासिक वापसी की है। दो महीने पहले पंचायत सदस्यों के चुनाव में पिछड़ने वाली भाजपा ने अध्यक्ष पद के चुनाव में एकतरफा जीत हासिल कर विपक्षी दलों को चौंका दिया है।
शनिवार को आए नतीजों ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। प्रदेश की 75 जिला पंचायत अध्यक्ष सीटों में से भाजपा और उसके सहयोगियों ने 67 सीटों पर विजय पताका फहराई है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) को करारी शिकस्त मिली है और वह महज 5 से 6 सीटों पर सिमट कर रह गई है।
कैसे पलटी बाजी?
अवध और पूर्वांचल में भगवा लहर: भाजपा ने वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ और अयोध्या जैसे प्रमुख गढ़ों में आसानी से अपने अध्यक्ष बना लिए। निर्दलीय सदस्यों का समर्थन जुटाने में भाजपा की रणनीति सफल रही।
अखिलेश यादव का आरोप: इस करारी हार पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रशासन पर सत्ता के दुरुपयोग और लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि "जनता ने सपा को चुना था, लेकिन प्रशासन ने भाजपा को जितवाया है।"
2022 का शंखनाद: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जीत का श्रेय पीएम मोदी की नीतियों को दिया है। भाजपा इसे 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता का 'विश्वास मत' बता रही है।
राजनीतिक मायने (Political Analysis): यह जीत भाजपा के लिए 'संजीवनी' का काम करेगी। कोरोना की दूसरी लहर के बाद पार्टी के मनोबल पर जो असर पड़ा था, वह इस जीत से काफी हद तक दूर हो गया है। हालांकि, यह चुनाव जनता द्वारा सीधे नहीं, बल्कि चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा होता है, इसलिए असली परीक्षा 2022 में ही होगी। लेकिन फिलहाल, 'गांव की सरकार' पर अब पूरी तरह से योगी सरकार का नियंत्रण हो गया है।