संसद के आगामी बजट सत्र (Budget Session 2026) से पहले 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (One Nation, One Election) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। सूत्रों के मुताबिक, विधि आयोग (Law Commission) ने एक साथ चुनाव कराने को लेकर अपनी फाइनल रिपोर्ट तैयार कर ली है और इसे जल्द ही कानून मंत्रालय को सौंपा जा सकता है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि मोदी सरकार इसी सत्र में इस ऐतिहासिक बिल को संसद के पटल पर रख सकती है।
क्या है सरकार की दलील? सरकार का मानना है कि देश में हर साल कहीं न कहीं चुनाव होते रहते हैं, जिससे विकास कार्य ठप हो जाते हैं और सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है। अगर लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो देश का अरबों रुपया बचेगा और सरकार पूरे पांच साल बिना किसी रुकावट के काम कर सकेगी।
विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध? दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताया है। विपक्ष का कहना है कि यह संघीय ढांचे (Federal Structure) पर हमला है। उनका तर्क है कि अगर केंद्र सरकार गिर जाती है, तो क्या सभी राज्यों में भी दोबारा चुनाव होंगे? क्षेत्रीय पार्टियों को डर है कि एक साथ चुनाव होने पर राष्ट्रीय मुद्दे स्थानीय मुद्दों पर हावी हो जाएंगे, जिससे उन्हें नुकसान होगा। संसद में इस बिल पर जोरदार हंगामे के आसार हैं।