वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) के सर्वे का काम पूरा होते ही एक बड़े दावे ने देश भर में हलचल मचा दी है। हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि मस्जिद के वजूखाने (Wazu Khana) में सर्वे के दौरान एक विशाल 'शिवलिंग' मिला है। इस दावे के तुरंत बाद वाराणसी की स्थानीय अदालत ने उस जगह को सील करने का आदेश दे दिया है, जहां कथित शिवलिंग मिलने की बात कही गई है।
क्या हुआ सर्वे के आखिरी दिन? तीन दिनों तक चले वीडियोग्राफी सर्वे के बाद जैसे ही टीम बाहर निकली, हिंदू पक्ष के सोहनलाल आर्य ने मीडिया के सामने आकर कहा, "बाबा मिल गए! जिसकी नंदी प्रतीक्षा कर रहे थे, वो मिल गए।" उनका इशारा मस्जिद परिसर के अंदर कुएं नुमा संरचना की ओर था। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह वही आदि विशेश्वर का शिवलिंग है जिसे मुगल आक्रांताओं ने छिपा दिया था।
मुस्लिम पक्ष का पलटवार: दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। मस्जिद कमेटी का कहना है कि जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है, वह असल में वजूखाने का एक 'फव्वारा' (Fountain) है। उनका आरोप है कि माहौल खराब करने के लिए भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज: इस घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर खुशी जताई और इसे सनातन सत्य की जीत बताया। वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे 1991 के पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act) का उल्लंघन बताया और कहा कि वे एक और बाबरी मस्जिद नहीं खोना चाहते।
फिलहाल, वाराणसी कोर्ट ने सीआरपीएफ (CRPF) को उस जगह की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी है और वहां किसी के भी जाने पर रोक लगा दी है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के आसार हैं, और यह मुद्दा आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति का केंद्र रहने वाला है।