पूर्वांचल की राजनीति और अपराध की दुनिया में दशकों तक खौफ का पर्याय रहे मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) की गुरुवार देर रात मौत हो गई। 63 वर्षीय मुख्तार को बांदा जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) बताई गई है।
परिवार का गंभीर आरोप: मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी और भाई अफजाल अंसारी ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मुख्तार को खाने में 'धीमा जहर' (Slow Poison) दिया जा रहा था, जिसकी शिकायत उन्होंने कुछ दिन पहले अदालत में भी की थी। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
गाजीपुर में सन्नाटा, धारा 144 लागू: मऊ और गाजीपुर (Ghazipur) में मुख्तार का रसूख ऐसा था कि उसकी मौत की खबर फैलते ही हजारों समर्थक उसके घर के बाहर जमा हो गए। एहतियात के तौर पर पूरे उत्तर प्रदेश में धारा 144 लागू कर दी गई है। मऊ, बांदा और गाजीपुर में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने फ्लैग मार्च किया है।
एक युग का अंत: 5 बार विधायक रहे मुख्तार अंसारी पर हत्या, अपहरण और रंगदारी के 60 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे। कृष्णानंद राय हत्याकांड हो या मऊ दंगे, उसका नाम हर बड़ी वारदात से जुड़ा रहा। अतीक अहमद के बाद मुख्तार की मौत से यूपी में माफिया राज के एक और बड़े अध्याय का अंत हो गया है। उसका शव पोस्टमार्टम के बाद गाजीपुर के कालीबाग कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा।