उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज एक नया इतिहास लिखा गया है। तमाम कयासों और एग्जिट पोल्स की भविष्यवाणियों को सही साबित करते हुए, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। 1985 के बाद यह पहली बार है जब यूपी में कोई मुख्यमंत्री अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में लौटा है।
योगी 2.0 का रास्ता साफ (Victory Highlights): चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा गठबंधन ने 403 में से 270+ (रुझान/जीत) सीटों पर बढ़त बनाकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। लखीमपुर खीरी से लेकर हाथरस तक, कानून-व्यवस्था और 'बुलडोजर मॉडल' पर जनता ने भरोसा जताया है। इसके अलावा, कोरोना काल में दी गई 'मुफ्त राशन योजना' ने महिला वोटरों (Silent Voters) को भाजपा के पक्ष में लामबंद किया।
सपा ने बढ़ाई सीटें, लेकिन सत्ता से दूर: अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी (SP) ने 2017 के मुकाबले अपना प्रदर्शन काफी बेहतर किया है और 100 का आंकड़ा पार कर लिया है, लेकिन वे भाजपा के विजय रथ को रोकने में नाकाम रहे। स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे दलबदलुओं की हार ने भी सपा को झटका दिया है।
बसपा और कांग्रेस का सफाया: इस चुनाव में मायावती की बसपा (BSP) और प्रियंका गांधी की कांग्रेस पूरी तरह हाशिए पर चली गई हैं। बसपा का कोर वोट बैंक खिसक कर भाजपा और सपा में बंट गया, जिससे यूपी की राजनीति अब पूरी तरह 'बाइपोलर' (दो ध्रुवीय) हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस जीत को 'सुशासन और विकास' की जीत बताया है। लखनऊ स्थित भाजपा कार्यालय में होली से पहले ही होली शुरू हो गई है। अब सबकी निगाहें नई कैबिनेट और शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।