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मिशन 2027 का शंखनाद: लखनऊ में अटल जयंती पर सीएम योगी की हुंकार, तो कन्नौज से अखिलेश ने शुरू की 'साइकिल यात्रा'

Mission 2027 Kickoff

लखनऊ: साल 2025 अब अपनी विदाई ले रहा है, लेकिन जाते-जाते इसने उत्तर प्रदेश में अगले महा-मुकाबले यानी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 (UP Election 2027) की नींव पूरी तरह रख दी है। आज 25 दिसंबर (सुशासन दिवस) के मौके पर प्रदेश की राजनीति में दो बड़ी घटनाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने आज आधिकारिक रूप से अपने चुनाव अभियान का शंखनाद कर दिया है।

लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन: 'लक्ष्य 150+' का मंत्र

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर लखनऊ के लोक भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा कार्यकर्ताओं को अभी से 'इलेक्शन मोड' में आने का कड़ा संदेश दिया। हजारों कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने "लक्ष्य 150+" (लोकसभा सीटों के अनुपात में विधानसभा जीत का लक्ष्य) का मंत्र दिया।

सीएम योगी ने कहा, "अगले डेढ़ साल तक हमें चैन से नहीं बैठना है। हमें हर लाभार्थी के घर तक पहुंचना है और उन्हें याद दिलाना है कि 2017 से पहले यूपी में माफिया राज था, बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। आज का यूपी उत्तम प्रदेश है। हमें जाति के जहर को विकास के अमृत से काटना है।"

कन्नौज में सड़कों पर उतरी समाजवादी पार्टी

दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी नेता और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी 'कर्मभूमि' कन्नौज से अपनी महत्वाकांक्षी 'पीडीए साइकिल यात्रा 2.0' (PDA Cycle Yatra) के दूसरे चरण की शुरुआत की। लाल टोपी पहने हजारों कार्यकर्ताओं के साथ साइकिल चलाते हुए अखिलेश ने शक्ति प्रदर्शन किया।

यात्रा के दौरान अखिलेश ने तीन मुख्य मुद्दों पर सरकार को घेरा:

  1. बेरोजगारी: पेपर लीक और भर्ती में देरी का मुद्दा।
  2. महंगाई: बिजली के बढ़ते दाम और खाद की किल्लत।
  3. आवारा पशु: सांडों की समस्या (Stray Cattle Issue) को उन्होंने किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा बताया।

अखिलेश ने हुंकार भरते हुए कहा, "2022 में जो कसर रह गई थी, उसे 2027 में सूद समेत पूरा करेंगे। भाजपा का 'बांटो और राज करो' का फॉर्मूला अब नहीं चलेगा, अब 'जुड़ेंगे और जीतेंगे' का दौर है।"

विश्लेषण: 2026 होगा घमासान का साल

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि आने वाला साल 2026 उत्तर प्रदेश के लिए रैलियों, धरनों और आरोप-प्रत्यारोप का साल होगा। मायावती की बसपा भी गांवों में 'कैडर कैंप' लगा रही है। कुल मिलाकर, यूपी की रणभेरी बज चुकी है और अब हर दिन एक नई सियासी चाल देखने को मिलेगी।

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