श्रीहरिकोटा: 14 जुलाई 2025 का दिन भारत के लिए 'अमृतकाल' का सबसे गौरवशाली क्षण बन गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन 'गगनयान' (Gaganyaan) को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। GSLV Mk-III (LVM3) रॉकेट ने तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगननॉट्स) को लेकर अंतरिक्ष की कक्षा में प्रवेश किया। राकेश शर्मा के 1984 के सोवियत मिशन के 41 साल बाद, यह पहली बार है जब भारतीय, भारतीय रॉकेट से, भारतीय मिट्टी से अंतरिक्ष में गए हैं।
तीनों गगननॉट्स—ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला—अगले 3 दिनों तक पृथ्वी की निचली कक्षा (400 किमी) में चक्कर लगाएंगे और माइक्रोग्रैविटी पर प्रयोग करेंगे। मिशन कंट्रोल सेंटर से संपर्क स्थापित होते ही प्रधान मंत्री ने कहा, "तुम नभ को चूमने वाले नए भारत के दूत हो।"
इसरो चीफ एस सोमनाथ ने पुष्टि की कि क्रू मॉड्यूल सुरक्षित रूप से कक्षा में स्थापित हो गया है। यह मिशन भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Spaceflight) क्षमता वाला चौथा देश बनाता है।
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पूरा देश टीवी स्क्रीनों पर टकटकी लगाए बैठा था। स्कूलों में लाइव टेलीकास्ट दिखाया गया। यह मिशन न केवल विज्ञान बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के आत्म-विश्वास की नई उड़ान है। अब सबकी नजरें उनकी सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं, जो अरब सागर में पैराशूट के जरिए होगी।