श्रीहरिकोटा: चांद और सूरज को फतह करने के बाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अब सौर मंडल के सबसे गर्म और रहस्यमय ग्रह शुक्र (Venus) की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। आज (22 मई 2025) सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV Mk-II रॉकेट ने भारत के पहले शुक्र मिशन 'शुक्रयान-1' (Shukrayaan-1) को लेकर सफलतापूर्वक उड़ान भरी। यह मिशन शुक्र ग्रह के घने वातावरण, सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों और उसकी सतह के नीचे छिपे ज्वालामुखियों का अध्ययन करेगा।
शुक्र को 'पृथ्वी की जुड़वां बहन' कहा जाता है, लेकिन वहां का वातावरण नर्क जैसा है। तापमान 475 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और दबाव पृथ्वी से 90 गुना ज्यादा है। इसरो चीफ ने बताया कि शुक्रयान को ग्रह की कक्षा (Orbit) तक पहुंचने में करीब 110 दिन लगेंगे। यह ऑर्बिटर 4 साल तक शुक्र के चक्कर लगाएगा। इसमें स्वीडन, फ्रांस और जर्मनी के साथ मिलकर बनाए गए विशेष रडार और पेलोड्स लगे हैं, जो बादलों के पार भी देख सकेंगे।
वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि एक ग्रह जो आकार और संरचना में पृथ्वी जैसा था, वह इतना गर्म और रहने के अयोग्य कैसे बन गया? क्या वहां कभी जीवन था? इन सवालों के जवाब हमें जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को समझने में मदद कर सकते हैं। यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी भी 2030 के आसपास अपने शुक्र मिशन भेजने वाले हैं, लेकिन भारत ने उनसे पहले पहुंचकर बढ़त बना ली है।
इसरो की इस कामयाबी पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। कम लागत में इतने जटिल मिशन को अंजाम देकर इसरो ने फिर साबित कर दिया है कि वह 'स्पेस सुपरपावर' है। सोशल मीडिया पर #Shukrayaan और #ISRO टॉप ट्रेंड कर रहे हैं।