जींद (हरियाणा): भारतीय रेलवे ने प्रदूषण मुक्त परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। आज (10 मई 2025) हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) का सफल ट्रायल रन किया गया। जर्मनी और चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा देश बन गया है जिसने अपनी खुद की हाइड्रोजन ईंधन सेल (Fuel Cell) तकनीक पर आधारित ट्रेन चलाई है।
इस ट्रेन को 'वंदे भारत' की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, लेकिन यह डीजल या बिजली से नहीं, बल्कि हाइड्रोजन गैस से चलती है। सबसे खास बात यह है कि यह ट्रेन धुएं की जगह केवल भाप (Steam) और पानी छोड़ती है, यानी इससे प्रदूषण बिल्कुल शून्य (Zero Emission) होता है। इसकी रफ्तार 140 किमी/घंटा तक हो सकती है और एक बार टैंक फुल करने पर यह 1000 किलोमीटर तक चल सकती है।
रेल मंत्री ने कहा, "हमारा लक्ष्य 2030 तक रेलवे को 'नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक' बनाना है। यह ट्रेन हेरिटेज रूट्स (दार्जिलिंग, कालका-शिमला) पर डीजल इंजनों की जगह लेगी।" इस परियोजना पर 80 करोड़ रुपये प्रति ट्रेन की लागत आई है। यह ट्रेन बहुत कम शोर करती है, जिससे यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।
हालांकि, हाइड्रोजन ईंधन अभी महंगा है, लेकिन सरकार का मानना है कि 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत भविष्य में इसकी कीमतें कम होंगी। यह तकनीकी उपलब्धि भारतीय इंजीनियरों की क्षमता का प्रमाण है।