लखनऊ: लोकसभा चुनाव 2024 में मिली हार के सदमे से उबरते हुए उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जबरदस्त वापसी की है। प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव (By-Elections) के नतीजों में भाजपा गठबंधन ने 7 सीटें जीतकर समाजवादी पार्टी के 'PDA' फॉर्मूले की हवा निकाल दी है। अखिलेश यादव की सपा अपनी सिर्फ 2 पारंपरिक सीटें (करहल और सीसामऊ) ही बचा सकी।
'बंटेंगे तो कटेंगे' का असर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम योगी आदित्यनाथ का "बंटेंगे तो कटेंगे" वाला नारा और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में गया। कुंदरकी (Kundarki) जैसी मुस्लिम बहुल सीट पर भाजपा की जीत ने सबको चौंका दिया है। इसके अलावा गाजियाबाद, फूलपुर, खैर और मझवां में भी कमल खिला। मीरापुर सीट भाजपा की सहयोगी रालोद (RLD) के खाते में गई।
2027 के लिए भाजपा का मनोबल हाई
लोकसभा चुनाव में सपा ने 37 सीटें जीती थीं, जिससे भाजपा बैकफुट पर थी। लेकिन इस जीत ने सीएम योगी की लीडरशिप को फिर से साबित कर दिया है। अखिलेश यादव ने प्रशासन पर धांधली और वोटरों को डराने का आरोप लगाया, लेकिन नतीजों ने तय कर दिया है कि यूपी में मुकाबला अब 2027 के लिए और दिलचस्प होगा।