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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर एक बार फिर जहरीले धुएं की चपेट में है। दिवाली के बाद पराली जलने और प्रतिकूल मौसम के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 500 (गंभीर प्लस) के पार पहुंच गया है, जो मापने वाले मीटर की आखिरी सीमा है। सुबह के समय विजिबिलिटी इतनी कम है कि इंडिया गेट भी धुंध में गायब हो गया है। डॉक्टरों ने इसे 'मेडिकल इमरजेंसी' घोषित कर दिया है।
GRAP-4 की पाबंदियां लागू
प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए आयोग ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण लागू कर दिया है। इसके तहत:
- दिल्ली में ट्रकों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है (आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर)।
- 10वीं और 12वीं को छोड़कर सभी स्कूलों को ऑनलाइन कर दिया गया है।
- सरकारी और निजी दफ्तरों को 50% क्षमता के साथ काम करने या वर्क फ्रॉम होम देने की सलाह दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को पराली जलाने से रोकने में विफल रहने पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा, "हम लोगों को इस गैस चेंबर में मरने के लिए नहीं छोड़ सकते।" अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ, अस्थमा और आंखों में जलन की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि बुजुर्ग और बच्चे सुबह की सैर बंद कर दें और बाहर निकलते समय एन-95 मास्क का प्रयोग करें।