नई दिल्ली: लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लेह से पैदल दिल्ली पहुंचे मशहूर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) और उनके 150 साथियों को दिल्ली पुलिस ने सिंघू बॉर्डर पर हिरासत में ले लिया। करीब 1000 किलोमीटर की पदयात्रा (Climate March) करके आए इन प्रदर्शनकारियों को राजघाट जाने से रोक दिया गया, जिससे देश भर में आक्रोश फैल गया।
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हिरासत में लिए जाने के बाद सोनम वांगचुक ने पुलिस स्टेशन में ही अनशन शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद उन्हें 36 घंटे बाद रिहा किया गया और राजघाट जाने की अनुमति दी गई। वांगचुक का कहना है कि लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और ट्राइबल संस्कृति को बचाने के लिए उसे स्वायत्तता (Autonomy) की जरूरत है, जो केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद छिन गई है।
उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार अपने वादे पूरे करे। सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के साथ उनकी मुलाकात कराई जाएगी। इसके बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ा, लेकिन चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
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यह आंदोलन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बन गया है, जिसे देश भर के युवाओं का समर्थन मिल रहा है। 'सेव लद्दाख' (Save Ladakh) सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड बना रहा।