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Ladakh Delhi Chalo March: सोनम वांगचुक की पदयात्रा दिल्ली बॉर्डर पर रोकी गई; सिंघू बॉर्डर पर हिरासत, लद्दाख के लिए छठी अनुसूची की मांग

नई दिल्ली: लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लेह से पैदल दिल्ली पहुंचे मशहूर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) और उनके 150 साथियों को दिल्ली पुलिस ने सिंघू बॉर्डर पर हिरासत में ले लिया। करीब 1000 किलोमीटर की पदयात्रा (Climate March) करके आए इन प्रदर्शनकारियों को राजघाट जाने से रोक दिया गया, जिससे देश भर में आक्रोश फैल गया।

Sonam Wangchuk Activist
Image Source: Wikimedia Commons

हिरासत में लिए जाने के बाद सोनम वांगचुक ने पुलिस स्टेशन में ही अनशन शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद उन्हें 36 घंटे बाद रिहा किया गया और राजघाट जाने की अनुमति दी गई। वांगचुक का कहना है कि लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और ट्राइबल संस्कृति को बचाने के लिए उसे स्वायत्तता (Autonomy) की जरूरत है, जो केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद छिन गई है।

उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार अपने वादे पूरे करे। सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के साथ उनकी मुलाकात कराई जाएगी। इसके बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ा, लेकिन चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।

Ladakh Climate March Art
Image Credit: AI Generated

यह आंदोलन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक बन गया है, जिसे देश भर के युवाओं का समर्थन मिल रहा है। 'सेव लद्दाख' (Save Ladakh) सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड बना रहा।

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