भुवनेश्वर/भद्रक: बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवाती तूफान 'दाना' (Cyclone Dana) ने 24-25 अक्टूबर की दरमियानी रात ओडिशा के भितरकनिका और धामरा के बीच लैंडफॉल किया। 110 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। हजारों पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कच्ची सड़कें बह गईं। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भी भारी बारिश हुई।
Image Source: Wikimedia Commons (Representative)
ओडिशा सरकार की पूर्व तैयारियों और 'जीरो कैजुअल्टी' (Zero Casualty) नीति की बदौलत एक बड़ी मानवीय त्रासदी को टाल दिया गया। तूफान से पहले ही प्रशासन ने निचले इलाकों से करीब 6 लाख लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों (Cyclone Shelters) में पहुंचा दिया था। एनडीआरएफ (NDRF) की 20 और ओडिशा रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की 51 टीमों ने राहत कार्यों में मोर्चा संभाला।
तूफान के कारण भुवनेश्वर और कोलकाता एयरपोर्ट को 16 घंटे के लिए बंद रखा गया और 200 से ज्यादा ट्रेनें रद्द कर दी गईं। हालांकि, मैंग्रोव वनों (Mangrove Forests) ने तूफान की तीव्रता को कम करने में एक प्राकृतिक ढाल का काम किया। सीएम मोहन चरण माझी ने प्रशासन की मुस्तैदी की तारीफ की।
Image Credit: AI Generated
तूफान कमजोर होकर अब झारखंड और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ गया है। यह घटना एक बार फिर भारत की आपदा प्रबंधन क्षमता (Disaster Management) की सफलता की कहानी बयां करती है।