नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने एक बार फिर भारतीय बाजार में खलबली मचा दी है। 10 अगस्त को जारी अपनी नई रिपोर्ट में हिंडनबर्ग ने सेबी (SEBI) की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) और उनके पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बुच दंपति की उन ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी थी जिनका इस्तेमाल विनोद अडानी (गौतम अडानी के भाई) ने कथित तौर पर हेराफेरी के लिए किया था।
हिंडनबर्ग का कहना है कि इसी 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) के कारण सेबी 18 महीने बाद भी अडानी मामले में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। माधवी बुच और उनके पति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे "चरित्र हनन" की कोशिश बताया है और कहा है कि उनका वित्तीय विवरण पारदर्शी है।
अडाणी समूह ने भी इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताया है। विपक्ष ने मामले की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच की मांग की है। हालांकि, शेयर बाजार पर इस बार रिपोर्ट का असर पिछले साल जैसा विनाशकारी नहीं रहा, लेकिन नियामक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर उठे हैं।