राजगीर (बिहार): बिहार के राजगीर में आज (19 जून 2024) इतिहास ने करवट ली है। बख्तियार खिलजी द्वारा जलाए जाने के 800 साल बाद, प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय (Nalanda University) अपने नए और भव्य रूप में फिर से जीवंत हो उठा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया। यह कैंपस प्राचीन नालंदा के खंडहरों के पास ही 455 एकड़ में बनाया गया है।
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पीएम मोदी ने कहा, "नालंदा केवल एक नाम नहीं, एक पहचान है। किताबें जल सकती हैं, लेकिन ज्ञान को नहीं मिटाया जा सकता।" नया कैंपस पूरी तरह से 'नेट जीरो' (Net Zero) है, यानी यहां बिजली और पानी का उत्पादन और रीसाइकिलिंग परिसर के भीतर ही होता है। इसमें 100 हेक्टेयर में जल निकाय बनाए गए हैं। इस प्रोजेक्ट में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, चीन, लाओस, और सिंगापुर समेत 17 देशों ने सहयोग किया है, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय महत्ता को दर्शाता है।
यहां प्राचीन भारतीय इतिहास, बौद्ध अध्ययन, और पारिस्थितिकी जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। कैंपस की वास्तुकला में प्राचीन नालंदा की झलक दिखती है, जिसमें लाल ईंटों का उपयोग किया गया है।
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उद्घाटन समारोह में 17 देशों के राजदूत मौजूद थे। यह विश्वविद्यालय भारत की 'सॉफ्ट पावर' और 'विश्वगुरु' बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दुनिया भर के छात्रों को आकर्षित करेगा।