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लंदन/नई दिल्ली: कोरोना महामारी के दौरान दुनिया की जान बचाने वाली वैक्सीन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। फार्मास्युटिकल दिग्गज एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) ने पहली बार ब्रिटिश कोर्ट में स्वीकार किया है कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन (जिसे भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ने 'कोविशील्ड' नाम से बनाया और बेचा) से बहुत ही दुर्लभ मामलों में गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। इसे TTS (Thrombosis with Thrombocytopenia Syndrome) कहा जाता है, जिससे शरीर में खून के थक्के (Blood Clots) जम सकते हैं और प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं।
भारत में चिंता की लहर
भारत में 80% से ज्यादा लोगों को कोविशील्ड वैक्सीन ही लगी थी, इसलिए इस खबर ने लोगों में डर पैदा कर दिया। सोशल मीडिया पर हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को वैक्सीन से जोड़ा जाने लगा। हालांकि, भारतीय डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह साइड इफेक्ट 'बेहद दुर्लभ' (लाखों में एक) है और यह वैक्सीन लगने के कुछ हफ्तों के भीतर ही दिखाई देता है। अब सालों बाद इसका खतरा न के बराबर है।
कंपनी ने वापस ली वैक्सीन
विवाद बढ़ने के कुछ दिनों बाद ही एस्ट्राजेनेका ने दुनिया भर के बाजारों से अपनी कोविड वैक्सीन वापस लेने (Withdraw) का फैसला किया। कंपनी ने इसके पीछे 'व्यावसायिक कारणों' और नए वैरिएंट के लिए अपडेटेड वैक्सीन की उपलब्धता का हवाला दिया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन के फायदे उसके जोखिमों से कहीं ज्यादा थे, और इसी ने लाखों जानें बचाई हैं, इसलिए घबराने के बजाय तथ्यों पर ध्यान देना जरूरी है।