बालासोर (ओडिशा): भारत की रक्षा शक्ति में आज (11 मार्च 2024) एक बहुत बड़ा इजाफा हुआ है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 'मिशन दिव्यास्त्र' (Mission Divyastra) के तहत अग्नि-5 मिसाइल का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया, जो MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक से लैस है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, यूके) के क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास यह क्षमता है।
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MIRV तकनीक का मतलब है कि एक ही मिसाइल में कई परमाणु वारहेड (Warheads) लगाए जा सकते हैं, और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर दागा जा सकता है। यानी एक अग्नि-5 मिसाइल एक साथ दुश्मन के 3 से 4 शहरों या ठिकानों को निशाना बना सकती है। यह मिसाइल 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता रखती है, जिससे पूरा चीन और एशिया का बड़ा हिस्सा इसकी जद में आ गया है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका एवियोनिक्स सिस्टम और सेंसर पैकेज पूरी तरह स्वदेशी है। इस परीक्षण में एक महिला वैज्ञानिक ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में नेतृत्व किया, जो 'नारी शक्ति' का उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा, "हमें अपने DRDO वैज्ञानिकों पर गर्व है।"
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यह टेस्ट ऐसे समय में हुआ है जब चीन अपनी सीमा पर आक्रामकता दिखा रहा है। यह परीक्षण भारत की 'नो फर्स्ट यूज' पॉलिसी के बावजूद एक मजबूत निवारक (Deterrent) के रूप में काम करेगा।