नई दिल्ली: भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) में आज (21 दिसंबर 2023) एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। संसद ने अंग्रेजों के जमाने के 150 साल पुराने कानूनों को बदलने वाले तीन नए विधेयकों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—को मंजूरी दे दी है। ये कानून क्रमशः IPC (1860), CrPC (1973) और Evidence Act (1872) की जगह लेंगे।
Image Source: Wikimedia Commons
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य "दंड देना नहीं, बल्कि न्याय देना" है। सबसे बड़ा बदलाव 'राजद्रोह' (Sedition) कानून को खत्म करना है; इसकी जगह अब 'देशद्रोह' (Acts endangering sovereignty) को अपराध माना जाएगा। नए कानूनों में मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) और नाबालिग से रेप के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही, 'हिट एंड रन' के मामलों में सजा को सख्त किया गया है (हालांकि बाद में ट्रक ड्राइवरों के विरोध के बाद इसे होल्ड पर रखा गया)।
पहली बार आतंकवाद को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। एफआईआर से लेकर जजमेंट तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का प्रावधान है। पुलिस को अब 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जिससे 'तारीख पे तारीख' कल्चर खत्म होगा।
Image Credit: AI Generated
विपक्ष ने इन बिलों को जल्दबाजी में पास करने का आरोप लगाया क्योंकि 140 से अधिक सांसदों के निलंबन के दौरान इन्हें पारित किया गया। हालांकि, सरकार का कहना है कि ये कानून भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करेंगे और भारतीय आत्मा पर आधारित होंगे।