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Gaganyaan Mission Test: ISRO की एक और बड़ी कामयाबी! गगनयान की पहली टेस्ट फ्लाइट सफल; इंसान को अंतरिक्ष में भेजने का रास्ता साफ

Gaganyaan Crew Module ISRO
Image Source: Wikimedia Commons / ISRO

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 की ऐतिहासिक सफलता के बाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज (21 अक्टूबर 2023) एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' (Gaganyaan) के लिए आज पहली परीक्षण उड़ान (TV-D1) सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य 'क्रू एस्केप सिस्टम' (Crew Escape System) की जांच करना था, जो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

थोड़ी धड़कनें बढ़ीं, फिर मिली सफलता

सुबह 8:00 बजे लॉन्च का समय तय था, लेकिन लॉन्च से ठीक 5 सेकेंड पहले कंप्यूटर ने तकनीकी खराबी का संकेत देते हुए लिफ्ट-ऑफ रोक दिया। इसरो के वैज्ञानिकों की सांसें थम गईं। हालांकि, इसरो चीफ एस सोमनाथ और उनकी टीम ने महज 45 मिनट में समस्या को पहचाना और ठीक कर दिया। सुबह 10:00 बजे रॉकेट ने दोबारा उड़ान भरी। रॉकेट ने क्रू मॉड्यूल को 17 किलोमीटर की ऊंचाई पर ले जाकर अलग कर दिया। इसके बाद क्रू एस्केप सिस्टम ने मॉड्यूल को रॉकेट से दूर किया और पैराशूट की मदद से उसे सुरक्षित बंगाल की खाड़ी में उतार दिया।

क्यों खास है यह टेस्ट?

यह टेस्ट इसलिए बेहद अहम था क्योंकि जब भारत 2025 में अपने एस्ट्रोनॉट्स (गगननॉट्स) को अंतरिक्ष में भेजेगा, तो उनकी सुरक्षा सर्वोपरि होगी। यह सिस्टम ठीक वैसे ही काम करता है जैसे फाइटर जेट में इजेक्शन सीट होती है। भारतीय नौसेना ने समुद्र में गिरे मॉड्यूल को रिकवर कर लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो को बधाई देते हुए कहा, "यह भारत के अंतरिक्ष सफर में एक और सुनहरा अध्याय है। हम जल्द ही भारतीय को भारतीय रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजेंगे।" इस सफल परीक्षण के बाद अब आने वाले समय में रोबोट 'व्योममित्र' को अंतरिक्ष में भेजने का रास्ता साफ हो गया है।

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