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श्रीहरिकोटा: चांद के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने के महज 10 दिन बाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज (2 सितंबर) एक और ऐतिहासिक छलांग लगाई है। भारत का पहला सौर मिशन 'आदित्य-एल1' (Aditya-L1) आज सुबह 11:50 बजे पीएसएलवी-सी57 (PSLV-C57) रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह मिशन सूर्य के रहस्यों को सुलझाने के लिए एक बड़ी वैज्ञानिक पहल है।
लैग्रेंज पॉइंट-1 (L1) तक का सफर
आदित्य-एल1 को पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर 'लैग्रेंज पॉइंट-1' (L1) पर स्थापित किया जाएगा। इस जगह तक पहुंचने में यान को करीब 4 महीने (125 दिन) लगेंगे। L1 पॉइंट अंतरिक्ष में वह खास जगह है जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित हो जाता है, जिससे उपग्रह बिना ज्यादा ईंधन खर्च किए लगातार सूर्य पर नजर रख सकता है। यहां से सूर्य ग्रहण का भी कोई असर नहीं पड़ता।
क्या करेगा आदित्य?
इस उपग्रह में 7 पेलोड्स लगे हैं जो सूर्य की सबसे बाहरी परत (Corona), सौर हवाओं और चुंबकीय तूफानों का अध्ययन करेंगे। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि सूर्य का तापमान कैसे बदलता है और इसका धरती के मौसम और उपग्रहों पर क्या असर पड़ता है। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने कहा, "यह मिशन न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण डेटा भेजेगा।"