जेनेवा/नई दिल्ली: दुनिया भर में कोरोना वायरस का एक नया सब-वैरिएंट EG.5, जिसे अनौपचारिक रूप से 'एरिस' (Eris) कहा जा रहा है, तेजी से पैर पसार रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' (Variant of Interest) घोषित किया है। अमेरिका, ब्रिटेन और चीन में इसके मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। भारत में भी महाराष्ट्र में इस वैरिएंट का एक मामला सामने आया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।
एरिस, ओमिक्रॉन के XBB.1.9.2 का वंशज है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह पिछले वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामक है और इम्यूनिटी को चकमा देने में सक्षम है, लेकिन इससे बीमारी की गंभीरता बढ़ने के सबूत नहीं मिले हैं। लक्षणों में गले में खराश, नाक बहना, बुखार और शरीर में दर्द शामिल हैं।
भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारतीयों में हाइब्रिड इम्यूनिटी मौजूद है। हालांकि, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को भीड़भाड़ में मास्क पहनने की सलाह दी गई है। सरकार ने जीनोम सीक्वेंसिंग बढ़ाने पर जोर दिया है ताकि किसी भी नए म्यूटेशन का समय रहते पता लगाया जा सके।