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बाकू (अजरबैजान): शतरंज की बिसात पर भारत के 18 वर्षीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंदा (R. Praggnanandhaa) ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। FIDE शतरंज वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में, दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन (Magnus Carlsen) के खिलाफ खेलते हुए प्रज्ञानंदा भले ही टाई-ब्रेकर में हार गए, लेकिन उन्होंने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। वह विश्वनाथन आनंद के बाद वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय और दुनिया के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं।
कड़ी टक्कर और सिल्वर मेडल
फाइनल के क्लासिकल गेम ड्रॉ रहने के बाद मैच टाई-ब्रेकर में गया, जहां कार्लसन के अनुभव ने बाजी मार ली। हार के बावजूद, प्रज्ञानंदा का टूर्नामेंट में सफर शानदार रहा। उन्होंने दुनिया के नंबर 2 हिकारू नाकामुरा और नंबर 3 फैबियानो कारुआना जैसे दिग्गजों को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इस प्रदर्शन के साथ ही उन्होंने 2024 के कैंडिडेट टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई कर लिया है।
मां का सादापन बना प्रेरणा
टूर्नामेंट के दौरान प्रज्ञानंदा की मां नागलक्ष्मी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं, जो हर मैच के दौरान अपने बेटे के साथ साये की तरह रहीं। उनकी सादगी और बेटे की जीत पर आंखों में खुशी के आंसुओं ने नेटिजन्स को भावुक कर दिया। महिंद्रा ग्रुप के आनंद महिंद्रा ने प्रज्ञानंदा के माता-पिता को इलेक्ट्रिक कार गिफ्ट करने का ऐलान किया है। पीएम मोदी ने कहा, "हमें प्रज्ञानंदा पर गर्व है, वह भारत के युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं।"