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जोशीमठ (उत्तराखंड): बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला ऐतिहासिक शहर जोशीमठ (Joshimath) अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। जमीन धंसने (Land Subsidence) के कारण शहर के 600 से अधिक घरों, होटलों और सड़कों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। लोग कड़कड़ाती ठंड में अपने पुश्तैनी आशियाने छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
होटल माउंट व्यू और मलारी इन को गिराने का आदेश
प्रशासन ने शहर को तीन जोन (डेंजर, बफर और सेफ) में बांट दिया है। 'माउंट व्यू' और 'मलारी इन' जैसे बड़े होटल एक-दूसरे पर झुक गए हैं, जिन्हें असुरक्षित घोषित कर गिराने (Demolition) का काम शुरू कर दिया गया है। इसरो (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों ने खुलासा किया है कि जोशीमठ तेजी से नीचे धंस रहा है।
क्यों हो रहा है ऐसा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित निर्माण, एनटीपीसी (NTPC) की तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना की सुरंग और ड्रेनेज सिस्टम की कमी इस त्रासदी के मुख्य कारण हैं। स्थानीय लोग "एनटीपीसी गो बैक" के नारे लगा रहे हैं। केंद्र सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।