Image Source: Wikimedia Commons / ISRO (Representative)
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन स्पेस सेंटर से आज एक नई शुरुआत हुई है। भारत ने अपना पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट 'विक्रम-एस' (Vikram-S) सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। हैदराबाद स्थित स्टार्टअप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा बनाए गए इस रॉकेट ने 'मिशन प्रारंभ' (Mission Prarambh) के तहत आसमान में उड़ान भरी और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के निजी खिलाड़ियों की क्षमता को साबित कर दिया।
क्यों खास है यह मिशन?
अब तक भारत में रॉकेट बनाने और लॉन्च करने का काम सिर्फ सरकारी एजेंसी इसरो करती थी। 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद यह पहला बड़ा मील का पत्थर है। विक्रम-एस एक सब-ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसने तीन पेलोड्स को अंतरिक्ष में पहुंचाया। इसका नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।
'नई शुरुआत का प्रतीक'
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लॉन्चिंग को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "यह भारत के स्पेस सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत है। इसरो ने मेंटर की भूमिका निभाकर स्काईरूट को यह उपलब्धि हासिल करने में मदद की।" इस सफलता के बाद एलन मस्क की स्पेसएक्स की तरह भारत में भी कई स्पेस स्टार्टअप्स के लिए रास्ते खुल गए हैं, जो कम लागत में सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता रखते हैं।