नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े फैसले में, केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके 8 सहयोगी संगठनों पर तत्काल प्रभाव से 5 साल के लिए प्रतिबंध (Ban) लगा दिया है। सरकार ने इसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 'गैरकानूनी संगठन' घोषित किया है। यह कार्रवाई एनआईए (NIA) और ईडी (ED) द्वारा देश भर में की गई ताबड़तोड़ छापेमारी (ऑपरेशन ऑक्टोपस) के बाद की गई है।
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गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि PFI के संबंध वैश्विक आतंकवादी संगठनों जैसे ISIS और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) से पाए गए हैं। जांच एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि PFI देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और आतंकी फंडिंग में शामिल था। सरकार ने इसके सहयोगी संगठनों जैसे रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) को भी बैन किया है।
प्रतिबंध से पहले दो चरणों में चले 'ऑपरेशन ऑक्टोपस' के तहत 15 राज्यों में छापे मारे गए और 250 से अधिक PFI नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। एजेंसियों ने दावा किया कि संगठन 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए 'गजवा-ए-हिंद' जैसे एजेंडे पर काम कर रहा था। इसके अलावा, कई हत्याओं और दंगों में भी इसकी भूमिका सामने आई थी।
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इस बैन के बाद PFI के दफ्तरों को सील कर दिया गया है और इसके बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। कई राज्य सरकारों और मुस्लिम संगठनों ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि आरएसएस जैसे संगठनों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होनी चाहिए।