नोएडा: भारत के इतिहास में आज पहली बार भ्रष्टाचार की इतनी बड़ी और गगनचुंबी इमारत को जमींदोज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद नोएडा के सेक्टर 93ए में स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के अवैध ट्विन टावर्स (Twin Towers - Apex & Ceyane) को आज दोपहर ठीक 2:30 बजे नियंत्रित विस्फोट (Controlled Implosion) के जरिए गिरा दिया गया। यह कुतुब मीनार से भी ऊंचे (लगभग 100 मीटर) थे।
सिर्फ एक बटन और 3700 किलो बारूद
एडिफिस इंजीनियरिंग (Edifice Engineering) के चेतन दत्ता ने जैसे ही ब्लास्ट का बटन दबाया, एक तेज धमाका हुआ और टाश के पत्तों की तरह दोनों इमारतें महज 9 से 12 सेकंड के अंदर मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं। इसे गिराने के लिए पिलर्स में 9,600 छेद किए गए थे और उनमें 3,700 किलोग्राम विस्फोटक भरा गया था।
'वाटरफॉल इम्प्लोजन' तकनीक का कमाल
सबसे बड़ी चुनौती पास में स्थित एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज की रिहायशी इमारतों को बचाना था, जो ट्विन टावर्स से महज 9 मीटर की दूरी पर थीं। 'वाटरफॉल इम्प्लोजन' तकनीक की बदौलत मलबा सीधे नीचे गिरा और आसपास की इमारतों को खरोंच तक नहीं आई। हालांकि, धूल का एक विशाल गुबार उठा, जिसे नियंत्रित करने के लिए एंटी-स्मॉग गन्स और वाटर टैंकर पहले से तैनात थे। आसपास की सोसायटियों की छतों पर खड़े लोगों ने तालियां बजाकर इस कार्रवाई का स्वागत किया और इसे बिल्डर-अथॉरिटी गठजोड़ के खिलाफ बड़ी जीत बताया।