आज दोपहर 2:30 बजे जैसे ही बटन दबा, नोएडा के सेक्टर-93A में खड़ी करप्शन की दो विशाल मीनारें—एपेक्स और सियान (Supertech Twin Towers)—ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इतनी ऊंची (कुतुब मीनार से भी ऊंची) किसी रिहायशी इमारत को विस्फोटक लगाकर गिराया गया है।
धूल के गुबार में समाया सुपरटेक का अहंकार: विस्फोट इतना जबरदस्त
था कि महज 9 से 12 सेकंड के अंदर 100 मीटर ऊंची ये इमारतें मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं। इसके लिए 'वाटरफॉल इम्प्लोजन' तकनीक का इस्तेमाल किया गया और करीब 3700 किलो विस्फोटक का प्रयोग हुआ। आसपास की सोसाइटियों (Emerald Court) को धूल से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे, फिर भी धमाके के बाद पूरा इलाका धुएं और धूल के गुबार में छिप गया।
यूपी सरकार का कड़ा संदेश: इस कार्रवाई को योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति की सबसे बड़ी नजीर बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि ये टावर्स नोएडा अथॉरिटी और बिल्डर की मिलीभगत से अवैध रूप से बनाए गए थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में तत्कालीन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय लोगों की सांस में सांस: धमाके के बाद आसपास की इमारतों की स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू हो गई है। राहत की बात यह है कि पास की सोसायटीज को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। यह घटना देशभर के बिल्डरों और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा सबक मानी जा रही है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।