नई दिल्ली: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत सरकार ने आज (1 जुलाई 2022) से एक सख्त और बड़ा कदम उठाया है। देश भर में 'सिंगल-यूज प्लास्टिक' (Single-Use Plastic) के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने उन 19 वस्तुओं की सूची जारी की है जिनका इस्तेमाल आज से गैरकानूनी होगा। इनमें प्लास्टिक की स्ट्रॉ, ईयरबड्स, गुब्बारे की छड़ें, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक और थर्माकोल (Polystyrene) की सजावटी सामग्री शामिल हैं।
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प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत 1 लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक की जेल हो सकती है। सरकार ने इसके लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है जो बाजारों और मॉल्स में छापेमारी करेगी। हालांकि, पानी की बोतलों और दूध के पैकेटों को अभी इस दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन उनके लिए 'एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी' (EPR) के तहत रीसाइक्लिंग अनिवार्य कर दी गई है।
इस फैसले का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। भारत में हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसमें से अधिकांश सिंगल-यूज प्लास्टिक होता है जो कभी नष्ट नहीं होता। व्यापारियों और आम जनता के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। प्लास्टिक के चम्मच, प्लेट, कप और गिलास की जगह अब लकड़ी, कागज और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करना होगा।
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अमूल और पेप्सीको जैसी बड़ी कंपनियों ने सरकार से स्ट्रॉ पर प्रतिबंध को टालने का अनुरोध किया था, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह फैसला भावी पीढ़ी के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। जनता से भी अपील की गई है कि वे बाजार जाते समय कपड़े का थैला साथ लेकर जाएं।