नई दिल्ली: नए संसद भवन (Central Vista Project) की छत पर स्थापित विशाल राष्ट्रीय प्रतीक 'अशोक स्तंभ' (National Emblem) का अनावरण होते ही एक बड़ा राजनीतिक और कलात्मक विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को 9,500 किलोग्राम वजन और 6.5 मीटर ऊंचे कांस्य (Bronze) से बने इस प्रतीक का अनावरण किया था। विवाद शेरों के हाव-भाव (Expression) को लेकर है। विपक्ष और कुछ इतिहासकारों का आरोप है कि मूल सारनाथ के स्तंभ में शेर 'शांत और सौम्य' मुद्रा में थे, जबकि नए संसद भवन पर बने शेर 'आक्रामक और गुस्से' में दिखाई दे रहे हैं, उनके दांत बाहर निकले हुए हैं।
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कांग्रेस, टीएमसी और आरजेडी ने इसे "राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान" बताया है। प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया कि यह गांधी के अहिंसक भारत को "आक्रामक नए भारत" में बदलने का प्रतीक है। हालांकि, इस मूर्ति को बनाने वाले मूर्तिकार सुनील देवरे और रोमिल मूसेस ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मूल स्तंभ 1.6 मीटर का था, जबकि यह 6.5 मीटर का है। जब आप नीचे से ऊपर देखते हैं, तो एंगल और स्केल की वजह से ऐसा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि शेरों के कैरेक्टर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सरकार का बचाव करते हुए कहा, "अगर सारनाथ के शेरों को भी इसी आकार में बड़ा किया जाए और नीचे से देखा जाए, तो वे भी ऐसे ही दिखेंगे। यह देखने वाले के नजरिए पर निर्भर करता है।" सरकार ने कहा कि यह नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है।
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विवाद के बावजूद, यह संरचना इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है। इसे 100 से अधिक कारीगरों ने 9 महीने में तैयार किया है। इसे नए संसद भवन के सेंट्रल फ़ोयर के शीर्ष पर स्थापित किया गया है, जो आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र का नया चेहरा बनेगा।