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INS Vikrant Handover: समंदर का 'बाहुबली' तैयार! नेवी को मिला पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत; चीन-पाक की बढ़ी धड़कनें

कोच्चि: भारतीय नौसेना के लिए आज (28 जुलाई 2022) का दिन ऐतिहासिक गर्व का दिन है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने देश का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत (Indigenous Aircraft Carrier - IAC-1) 'INS विक्रांत' (INS Vikrant) आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना को सौंप दिया है। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा 5-6 देशों के क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास खुद का एयरक्राफ्ट कैरियर डिजाइन करने और बनाने की क्षमता है।

INS Vikrant Sea Trials
Image Source: Wikimedia Commons

20,000 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 45,000 टन वजनी युद्धपोत 'आत्मनिर्भर भारत' का सबसे बड़ा उदाहरण है। इसमें 76% सामग्री पूरी तरह से स्वदेशी है, जिसमें विशेष ग्रेड का स्टील भी शामिल है जिसे DRDO और SAIL ने विकसित किया है। यह पोत 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। यह इतना विशाल है कि इसमें दो फुटबॉल मैदान समा सकते हैं और इसके अंदर 2,400 कमरे हैं।

INS विक्रांत अपने साथ 30 लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर ले जा सकता है, जिसमें मिग-29K फाइटर जेट्स और कामोव-31 हेलिकॉप्टर शामिल हैं। इसकी अधिकतम गति 28 समुद्री मील (Knots) है। नौसेना ने बताया कि इसके समुद्री परीक्षण (Sea Trials) बेहद सफल रहे हैं और यह हर मौसम में दुश्मन का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

Fighter Jet on INS Vikrant
Image Credit: AI Generated

इस एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की पकड़ और मजबूत होगी, जहां चीन अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसका नाम भारत के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर (1961-1997) के नाम पर रखा गया है, जिसने 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री मोदी अगले महीने इसका औपचारिक कमीशनिंग करेंगे।

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