नई दिल्ली/पटना: भारतीय सेना में भर्ती की नई प्रक्रिया 'अग्निपथ योजना' (Agnipath Scheme) के ऐलान के बाद देश भर के युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। महज 4 साल की नौकरी, पेंशन की अनुपस्थिति और भविष्य की अनिश्चितता से नाराज सेना अभ्यर्थियों ने बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और हरियाणा में उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
रेलवे स्टेशन बने जंग का मैदान
बिहार के सिकंदराबाद, लखीसराय और आरा में प्रदर्शनकारियों ने आधा दर्जन से ज्यादा ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया। एसी बोगियां धू-धू कर जलती रहीं और यात्री जान बचाने के लिए भागते नजर आए। उत्तर प्रदेश के बलिया, अलीगढ़ और मथुरा में भी युवाओं ने बसों में तोड़फोड़ की और पुलिस पर पथराव किया। 'अग्निपथ वापस लो' और 'टीओडी (ToD) नहीं चाहिए' के नारों से सड़कें गूंज उठीं। हिंसा को देखते हुए कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
सरकार का डैमेज कंट्रोल: उम्र सीमा बढ़ाई
युवाओं के भारी विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा संशोधन किया है। रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि कोरोना के कारण पिछले दो साल से भर्ती नहीं हुई थी, इसलिए सिर्फ इस साल (2022) की भर्ती के लिए अधिकतम उम्र सीमा 21 वर्ष से बढ़ाकर 23 वर्ष कर दी गई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेना प्रमुखों ने युवाओं से शांति की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना वापस नहीं होगी और 'अग्निवीरों' को सेवा के बाद सीएपीएफ (CAPF) और असम राइफल्स में 10% आरक्षण दिया जाएगा। गृह मंत्रालय ने भी पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का ऐलान किया है।