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Criminal Procedure Bill 2022: अब पुलिस ले सकेगी अपराधियों के रेटिना और आइरिस स्कैन; लोकसभा में ऐतिहासिक बिल पेश, विपक्ष ने जताया विरोध

नई दिल्ली: संसद में आज (28 मार्च) मोदी सरकार ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया। गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने लोकसभा में 'आपराधिक प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022' (Criminal Procedure Identification Bill, 2022) रखा। यह बिल अंग्रेजों के जमाने के 1920 के 'कैदी शिनाख्त कानून' की जगह लेगा। इसके तहत पुलिस को अब गिरफ्तार किए गए लोगों के न केवल फिंगरप्रिंट, बल्कि आइरिस (आंख की पुतली), रेटिना स्कैन, हथेली के निशान और जैविक नमूने (DNA) लेने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा।

Parliament of India
Image Source: Wikimedia Commons

बिल के प्रावधानों के अनुसार, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) इस डेटा को 75 सालों तक सुरक्षित रख सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे अपराधियों की पहचान में आसानी होगी और दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) बढ़ेगी। आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से जांच एजेंसियों को सटीक सबूत जुटाने में मदद मिलेगी।

विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और ओवैसी ने इसे मौलिक अधिकारों और 'निजता के अधिकार' (Right to Privacy) का उल्लंघन बताया। उन्होंने आशंका जताई कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और आम नागरिकों के सर्विलांस के लिए किया जा सकता है। विपक्ष ने मांग की है कि इसमें डेटा सुरक्षा के कड़े प्रावधान जोड़े जाएं।

Biometric Identification Technology
Image Credit: AI Generated

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इस डेटा का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। यह बिल कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधियों में डर पैदा करने के लिए जरूरी है। अब यह बिल चर्चा और पास होने के लिए संसद के दोनों सदनों में रखा जाएगा।

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