नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के इतिहास में आज (21 जनवरी 2022) एक भावुक और ऐतिहासिक बदलाव हुआ। इंडिया गेट (India Gate) के नीचे पिछले 50 सालों से लगातार जल रही 'अमर जवान ज्योति' (Amar Jawan Jyoti) का विलय पास ही स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल (National War Memorial) की मशाल में कर दिया गया। एक भव्य सैन्य समारोह में एयर मार्शल बलभद्र राधा कृष्ण ने इंडिया गेट की लौ को मशाल में लिया और उसे पूरे सम्मान के साथ वॉर मेमोरियल ले जाकर वहां की मुख्य ज्योति में मिला दिया।
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अमर जवान ज्योति की स्थापना 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में की थी। सरकार का तर्क है कि इंडिया गेट पर औपनिवेशिक काल (प्रथम विश्व युद्ध) के शहीदों के नाम थे, जबकि नेशनल वॉर मेमोरियल में आजादी के बाद शहीद हुए सभी 26,466 भारतीय सैनिकों के नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं। इसलिए, शहीदों को श्रद्धांजलि देने की सही जगह वॉर मेमोरियल ही है।
इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। विपक्ष ने इसे "इतिहास को मिटाने" की कोशिश बताया और कहा कि अमर जवान ज्योति को बुझाना शहीदों का अपमान है। वहीं, पूर्व सैनिकों के एक बड़े वर्ग ने इसका स्वागत किया और कहा कि "शहीदों का घर" वॉर मेमोरियल ही है, इंडिया गेट नहीं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जनवरी (पराक्रम दिवस) को इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करने की भी घोषणा की है, जो जल्द ही ग्रेनाइट की भव्य प्रतिमा में बदल दी जाएगी। यह कदम इंडिया गेट परिसर को औपनिवेशिक प्रतीक से भारतीय राष्ट्रवाद के प्रतीक में बदलने की दिशा में उठाया गया है।