देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर पिछले कई दिनों से छात्रों और युवाओं के उग्र प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। NEET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं, कट-ऑफ में धांधली और पारदर्शी जांच की मांग को लेकर हजारों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे हैं। इस आंदोलन को तब और अधिक मजबूती मिली जब लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए।
आंदोलन की गंभीरता और बढ़ते जनसमर्थन को देखते हुए केंद्र सरकार हरकत में आई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक और छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात की। बंद कमरे में हुई इस वार्ता के दौरान सरकार ने आश्वासन दिया कि छात्रों की सभी जायज मांगों पर विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय निष्पक्ष समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा छात्रों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
वार्ता के सकारात्मक मोड़ पर पहुंचने के बाद सोनम वांगचुक ने संकेत दिया है कि यदि सरकार की ओर से समयबद्ध जांच का लिखित आश्वासन दे दिया जाता है, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। इसके बावजूद, जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती बनी हुई है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी या कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके। छात्र संगठनों का कहना है कि वे सरकार के लिखित पत्र का इंतजार कर रहे हैं।