भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक मुंबई स्थित मुख्यालय में शुरू हो गई है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। वित्तीय बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रिजर्व बैंक इस बार नीतिगत ब्याज दर (Repo Rate) में कोई कटौती करेगा या इसे यथावत रखेगा।
हालिया जारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई दर नियंत्रण के दायरे में बनी हुई है, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव के कारण केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपनाए हुए है। बैंकिंग क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई को 4 प्रतिशत के लक्षित दायरे में बनाए रखने और आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) को गति देने के बीच संतुलन साधना RBI के लिए मुख्य चुनौती होगी।
बैठक के समापन पर रिजर्व बैंक गवर्नर आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मौद्रिक नीति के फैसलों का ऐलान करेंगे। इसके साथ ही RBI चालू वित्त वर्ष के लिए देश की विकास दर (GDP Forecast) और महंगाई दर के अनुमानित आंकड़े भी जारी करेगा। बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर को उम्मीद है कि यदि रेपो रेट में नरमी का रुख अपनाया जाता है, तो इससे होम लोन और ऑटो लोन की EMI पर सीधा राहत भरा असर पड़ सकता है।