पूर्वोत्तर भारत में बीते कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते असम में बाढ़ की स्थिति अत्यंत विकराल और चिंताजनक हो गई है। ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। राज्य के 20 से अधिक जिलों के सैकड़ों गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे कृषि योग्य भूमि, मकान और स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। कई मुख्य मार्ग जलमग्न होने के कारण प्रभावित इलाकों का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की कई टीमें राहत और बचाव कार्यों में दिन-रात जुटी हुई हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को मोटर बोट्स के जरिए सुरक्षित स्थानों और ऊंचे इलाकों में बनाए गए अस्थाई राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। शिविरों में भोजन, पीने का साफ पानी और आवश्यक दवाइयां वितरित की जा रही हैं, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में रेस्क्यू टीमों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ के कारण काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) का एक बड़ा हिस्सा भी पानी में डूब गया है, जिससे वहां मौजूद वन्यजीवों, विशेषकर एक सींग वाले गेंडों के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। पार्क प्रशासन और वन विभाग की टीमें जानवरों को सुरक्षित ऊंचे इलाकों में भेजने के लिए गश्त बढ़ा चुकी हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में राज्य में और अधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।