अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर आज भारत के लिए दो बेहद अहम खबरें सामने आईं। मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ एक अहम द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों, छात्रों और रूसी मर्चेंट नेवी में कार्यरत नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद कड़े शब्दों में उठाया। भारत ने रूस से स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि वह भारतीय नागरिकों की त्वरित और सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए विशेष सेफ-पैसेज और डिप्लोमैटिक गलियारा उपलब्ध कराए।
इसी दौरान, लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा व्यापारिक जहाजों पर हमले और नई चेतावनियों के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार में हड़कंप मच गया है। हूती विद्रोहियों की सीधी कार्रवाई की चेतावनी के बाद कई भारतीय, चीनी और अन्य अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों ने स्वेज नहर के पारंपरिक रास्ते से जाने के बजाय अपने समुद्री मार्गों को बदल दिया है। अब जहाजों को अफ्रीका महाद्वीप के 'केप ऑफ गुड होप' का चक्कर लगाकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च काफी बढ़ गया है।
मार्ग बदलने के इस अचानक फैसले का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और माल ढुलाई की लागत (Freight Rates) पर देखने को मिल रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर में सैन्य तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में भारत सहित कई देशों में कच्चे तेल, डीजल और आयातित सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारतीय नौसेना ने इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपने युद्धपोतों और निगरानी विमानों की गश्त बढ़ा दी है ताकि भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों को पूरी सुरक्षा दी जा सके।